वाल्मीकि रामायण 4.42.3
महर्षि पुत्रम् मारीचम् अर्चिष्मन्तम् महाकपिम् ।वृ^इतम् कपिवरैः शूरैः महेन्द्र सदृ^इश द्युतिम्॥
maharṣi putram mārīcam arciṣmantam mahākapim |vṛ^itam kapivaraiḥ śūraiḥ mahendra sadṛ^iśa dyutim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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