वाल्मीकि रामायण 4.42.38
तेषाम् मध्ये स्थितो राजा मेरुः उत्तम पर्वतः ।आदित्येन प्रसन्नेन शैलो दत्त वरः पुरा॥
teṣām madhye sthito rājā meruḥ uttama parvataḥ |ādityena prasannena śailo datta varaḥ purā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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