वाल्मीकि रामायण 4.43.4
दिशम् हि उदीचीम् विक्रान्त हिम शैल अवतंसिकाम् ।सर्वतः परिमार्गध्वम् राम पत्नीम् यशस्विनीम्॥
diśam hi udīcīm vikrānta hima śaila avataṃsikām |sarvataḥ parimārgadhvam rāma patnīm yaśasvinīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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