वाल्मीकि रामायण 4.43.5
अस्मिन् कार्ये विनिवृत्ते कृते दाशरथेः प्रिये ।ऋणान् मुक्ता भविष्यामः कृत अर्था अर्थविदाम् वराः॥
asmin kārye vinivṛtte kṛte dāśaratheḥ priye |ṛṇān muktā bhaviṣyāmaḥ kṛta arthā arthavidām varāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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