वाल्मीकि रामायण 4.43.46
सर्व ऋतु सुख सेव्यानि फलन्ति अन्ये नगोत्तमाः ।महा अर्हाणि मणि चित्राणि फलन्ति अन्ये नगोत्तमाः॥
sarva ṛtu sukha sevyāni phalanti anye nagottamāḥ |mahā arhāṇi maṇi citrāṇi phalanti anye nagottamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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