वाल्मीकि रामायण 4.44.11
तम् समीक्ष्य महातेजा व्यवसायोत्तरम् हरिम् ।कृतार्थ इव संहृष्टः प्रहृष्ट इन्द्रिय मानसः॥
tam samīkṣya mahātejā vyavasāyottaram harim |kṛtārtha iva saṃhṛṣṭaḥ prahṛṣṭa indriya mānasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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