वाल्मीकि रामायण 4.50.11
विस्मय व्यग्र मनसो बभूवुः वानरर्षभाः ।संजात परिशंकाः ते तत् बिलम् प्लवग उत्तमाः॥
vismaya vyagra manaso babhūvuḥ vānararṣabhāḥ |saṃjāta pariśaṃkāḥ te tat bilam plavaga uttamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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