वाल्मीकि रामायण 4.56.3
कंदरात् अभिनिष्क्रम्य स विन्ध्यस्य महागिरेः ।उपविष्टान् हरीन् दृष्ट्वा हृष्टात्मा गिरम् अब्रवीत्॥
kaṃdarāt abhiniṣkramya sa vindhyasya mahāgireḥ |upaviṣṭān harīn dṛṣṭvā hṛṣṭātmā giram abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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