वाल्मीकि रामायण 4.56.4
विधिः किल नरम् लोके विधानेन अनुवर्तते ।यथा अयम् विहितो भक्ष्यः चिरात् मह्यम् उपागतः॥
vidhiḥ kila naram loke vidhānena anuvartate |yathā ayam vihito bhakṣyaḥ cirāt mahyam upāgataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें