वाल्मीकि रामायण 4.56.5
परंपराणाम् भक्षिष्ये वानराणाम् मृतम् मृतम् ।उवाच एतत् वचः पक्षी तान् निरीक्ष्य प्लवंगमान्॥
paraṃparāṇām bhakṣiṣye vānarāṇām mṛtam mṛtam |uvāca etat vacaḥ pakṣī tān nirīkṣya plavaṃgamān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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