वाल्मीकि रामायण 4.56.7
पश्य सीता - गृध्रा - अपदेशेन साक्षात् वैवस्वतो यमः ।इमम् देशम् अनुप्राप्तो वानराणाम् विपत्तये॥
paśya sītā - gṛdhrā - apadeśena sākṣāt vaivasvato yamaḥ |imam deśam anuprāpto vānarāṇām vipattaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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