वाल्मीकि रामायण 4.56.8
रामस्य न कृतम् कार्यम् न कृतम् राज शाशनम् ।हरीणाम् इयम् अज्ञाता विपत्तिः सहसा आगता॥
rāmasya na kṛtam kāryam na kṛtam rāja śāśanam |harīṇām iyam ajñātā vipattiḥ sahasā āgatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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