वाल्मीकि रामायण 4.59.3
क्व सीता केन वा दृष्टा को वा हरति मैथिलीम् ।तत् आख्यातु भवान् सर्वम् गतिः भव वन ओकसाम्॥
kva sītā kena vā dṛṣṭā ko vā harati maithilīm |tat ākhyātu bhavān sarvam gatiḥ bhava vana okasām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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