वाल्मीकि रामायण 4.59.4
को दाशरथि बाणानाम् वज्र वेग निपातिनाम् ।स्वयम् लक्ष्मणम् मुक्तानाम् न चिंतयति विक्रमम्॥
ko dāśarathi bāṇānām vajra vega nipātinām |svayam lakṣmaṇam muktānām na ciṃtayati vikramam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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