वाल्मीकि रामायण 4.59.7
अहम् अस्मिन् गिरौ दुर्गे बहु योजनम् आयते ।चिरात् निपतितो वृद्धः क्षीण प्राण पराक्रमः॥
aham asmin girau durge bahu yojanam āyate |cirāt nipatito vṛddhaḥ kṣīṇa prāṇa parākramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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