वाल्मीकि रामायण 4.60.13
उपेत्य च आश्रमम् पुण्यम् वृक्ष मूलम् उपाश्रितः ।द्रष्टु कामः प्रतीक्षे च भगवंतम् निशाकरम्॥
upetya ca āśramam puṇyam vṛkṣa mūlam upāśritaḥ |draṣṭu kāmaḥ pratīkṣe ca bhagavaṃtam niśākaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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