वाल्मीकि रामायण 4.60.15
तम् ऋक्षाः सृमरा व्याघ्राः सिंहा नाना सरीसृपाः ।परिवार्य उपगच्छन्ति दातारम् प्राणिनो यथा॥
tam ṛkṣāḥ sṛmarā vyāghrāḥ siṃhā nānā sarīsṛpāḥ |parivārya upagacchanti dātāram prāṇino yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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