वाल्मीकि रामायण 4.60.2
तम् अंगदम् उपासीनम् तैः सर्वैः हरिभिः वृतम् ।जनित प्रत्ययो हर्षात् संपातिः पुनः अब्रवीत्॥
tam aṃgadam upāsīnam taiḥ sarvaiḥ haribhiḥ vṛtam |janita pratyayo harṣāt saṃpātiḥ punaḥ abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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