वाल्मीकि रामायण 4.60.3
कृत्वा निःशब्दम् एक अग्राः शृण्वन्तु हरयो मम ।तथ्यम् संकीर्तयिष्यामि यथा जानामि मैथिलीम्॥
kṛtvā niḥśabdam eka agrāḥ śṛṇvantu harayo mama |tathyam saṃkīrtayiṣyāmi yathā jānāmi maithilīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें