वाल्मीकि रामायण 4.61.1
ततः तत् दारुणम् कर्म दुष्करम् साहसात् कृतम् ।आचचक्षे मुनेः सर्वम् सूर्य अनुगमनम् तथा॥
tataḥ tat dāruṇam karma duṣkaram sāhasāt kṛtam |ācacakṣe muneḥ sarvam sūrya anugamanam tathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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