वाल्मीकि रामायण 5.1.123
पूर्वं कृतयुगे तात पर्वताः पक्षिणोऽभवन् ।ते हि जग्मुर्दिशः सर्वा गरुडानिलवेगिनः॥
pūrvaṃ kṛtayuge tāta parvatāḥ pakṣiṇo'bhavan |te hi jagmurdiśaḥ sarvā garuḍānilaveginaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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