वाल्मीकि रामायण 5.1.2
दुष्करं निष्प्रतिद्वन्द्वं चिकीर्षन् कर्म वानरः ।समुदग्रशिरोग्रीवो गवांपतिरिवाबभौ॥
duṣkaraṃ niṣpratidvandvaṃ cikīrṣan karma vānaraḥ |samudagraśirogrīvo gavāṃpatirivābabhau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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