वाल्मीकि रामायण 5.1.3
अथ वैडूर्यवर्णेषु शाद्वलेषु महाबलः ।धीरः सलिलकल्पेषु विच्चार यथासुखम्॥
atha vaiḍūryavarṇeṣu śādvaleṣu mahābalaḥ |dhīraḥ salilakalpeṣu viccāra yathāsukham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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