वाल्मीकि रामायण 5.1.33
आनुपूर्व्येण वृत्तं च लाङ्गूलं लोमभिश्चितम् ।उत्पतिष्यन् विचिक्षेप पक्षिराज इवोरगम्॥
ānupūrvyeṇa vṛttaṃ ca lāṅgūlaṃ lomabhiścitam |utpatiṣyan vicikṣepa pakṣirāja ivoragam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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