वाल्मीकि रामायण 5.1.5
नीललोहितमाञ्जिष्ठपत्रवर्णैः सितासितैः ।स्वभावविहितैश्चित्रैर्धातुभिः समलंकृतम्॥
nīlalohitamāñjiṣṭhapatravarṇaiḥ sitāsitaiḥ |svabhāvavihitaiścitrairdhātubhiḥ samalaṃkṛtam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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