वाल्मीकि रामायण 5.1.8
स सूर्याय महेन्द्राय पवनाय स्वयंभुवे ।भूतेभ्यश्चाञ्जलिं कृत्वा चकार गमने मतिम्॥
sa sūryāya mahendrāya pavanāya svayaṃbhuve |bhūtebhyaścāñjaliṃ kṛtvā cakāra gamane matim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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