वाल्मीकि रामायण 5.1.97
मम हीक्ष्वाकवः पूज्याः परं पूज्यतमास्तव ।कुरु साचिव्यमस्माकं न नः कार्यमतिक्रमेत्॥
mama hīkṣvākavaḥ pūjyāḥ paraṃ pūjyatamāstava |kuru sācivyamasmākaṃ na naḥ kāryamatikramet ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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