वाल्मीकि रामायण 5.13.51
रामाय उपहरिष्यामि पशुम् पशु पतेर् इव ।इति चिन्ता समापन्नः सीताम् अनधिगम्य ताम्॥
rāmāya upahariṣyāmi paśum paśu pater iva |iti cintā samāpannaḥ sītām anadhigamya tām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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