वाल्मीकि रामायण 5.17.24
अशोकवनिकामध्ये शोकसागरमाप्लुताम् ।ताभिः परिवृताम् तत्र सग्रहामिव रोहिणीम्॥
aśokavanikāmadhye śokasāgaramāplutām |tābhiḥ parivṛtām tatra sagrahāmiva rohiṇīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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