वाल्मीकि रामायण 5.18.3
अथ मङ्गलवादित्रशब्दैः श्रुतिमनोहरैः ।प्रबुध्यत महाबाहुर्दशग्रीवो महाबलः॥
atha maṅgalavāditraśabdaiḥ śrutimanoharaiḥ |prabudhyata mahābāhurdaśagrīvo mahābalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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