वाल्मीकि रामायण 5.2.3
योजनानां शतं श्रीमांस्तीर्त्वाप्युत्तमविक्रमः ।अनिःस्वसन् कपिस्तत्र न ग्लानिमधिगच्छति॥
yojanānāṃ śataṃ śrīmāṃstīrtvāpyuttamavikramaḥ |aniḥsvasan kapistatra na glānimadhigacchati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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