वाल्मीकि रामायण 5.2.7
शैलांश्च तरुसंचन्नान् वनराजीश्च पुष्पिताः ।अभिचक्राम तेजस्वी हनुमान् प्लवगर्षभः॥
śailāṃśca tarusaṃcannān vanarājīśca puṣpitāḥ |abhicakrāma tejasvī hanumān plavagarṣabhaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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