वाल्मीकि रामायण 5.24.11
छिन्ना भिन्ना विभक्ता वा दीप्ते वाग्नौ प्रदीपिता ।रावणं नोपतिष्ठेयं किं प्रलापेन वश् चिरम्॥
chinnā bhinnā vibhaktā vā dīpte vāgnau pradīpitā |rāvaṇaṃ nopatiṣṭheyaṃ kiṃ pralāpena vaś ciram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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