वाल्मीकि रामायण 5.24.25
अचिरेणैव कालेन प्राप्स्याम्येव मनोरथम् ।दुष्प्रस्थानोऽयमाख्याति सर्वेषां वो विपर्ययः॥
acireṇaiva kālena prāpsyāmyeva manoratham |duṣprasthāno'yamākhyāti sarveṣāṃ vo viparyayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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