वाल्मीकि रामायण 5.30.3
यां कपीनां सहस्राणि सुबहून्ययुतानि च ।दिक्षु सर्वासु मार्गन्ते सेयमासादिता मया॥
yāṃ kapīnāṃ sahasrāṇi subahūnyayutāni ca |dikṣu sarvāsu mārgante seyamāsāditā mayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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