वाल्मीकि रामायण 5.30.4
चारेण तु सुयुक्तेन शत्रोः शक्तिमवेक्षता ।गूढेन चरता तावदवेक्षितमिदं मया॥
cāreṇa tu suyuktena śatroḥ śaktimavekṣatā |gūḍhena caratā tāvadavekṣitamidaṃ mayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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