वाल्मीकि रामायण 5.30.5
राक्षसानां विशेषश्च पुरी चेयमवेक्षिता ।राक्षसाधिपतेरस्य प्रभावो रावणस्य च॥
rākṣasānāṃ viśeṣaśca purī ceyamavekṣitā |rākṣasādhipaterasya prabhāvo rāvaṇasya ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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