वाल्मीकि रामायण 5.32.2
सा ददर्श कपिं तत्र प्रश्रितं प्रियवादिनम् ।फुल्लाशोकोत्कराभासं तप्तचामीकरेक्षणम्॥
sā dadarśa kapiṃ tatra praśritaṃ priyavādinam |phullāśokotkarābhāsaṃ taptacāmīkarekṣaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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