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वाल्मीकि रामायण 5.32.5
रुरोद बहुधा सीता मन्दं मन्दस्वरा सती॥
ruroda bahudhā sītā mandaṃ mandasvarā satī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंरुरोद बहुधा सीता मन्दं मन्दस्वरा सती॥
ruroda bahudhā sītā mandaṃ mandasvarā satī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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