वाल्मीकि रामायण 5.32.4
विललाप भृशं सीता करुणं भयमोहिता ।रामरामेति दुःखार्ता लक्ष्मणेति च भामिनी॥
vilalāpa bhṛśaṃ sītā karuṇaṃ bhayamohitā |rāmarāmeti duḥkhārtā lakṣmaṇeti ca bhāminī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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