वाल्मीकि रामायण 5.34.5
सा तयोः कुशलं देवी निशम्य नरसिंहयोः ।प्रीतिसंहृष्टसर्वाङ्गी हनुमन्तमथाब्रवीत्॥
sā tayoḥ kuśalaṃ devī niśamya narasiṃhayoḥ |prītisaṃhṛṣṭasarvāṅgī hanumantamathābravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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