वाल्मीकि रामायण 5.34.8
तस्यास्तद्वचनं श्रुत्वा हनुमान् हरियूथपः ।सीतायाः शोकदीनायाः समीपमुपचक्रमे॥
tasyāstadvacanaṃ śrutvā hanumān hariyūthapaḥ |sītāyāḥ śokadīnāyāḥ samīpamupacakrame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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