वाल्मीकि रामायण 5.38.59
आनुकूल्येन धर्मात्मा त्यक्त्वा सुखमनुत्तमम् ।अनुगच्छति काकुत्स्थं भ्रातरं पालयन् वने॥
ānukūlyena dharmātmā tyaktvā sukhamanuttamam |anugacchati kākutsthaṃ bhrātaraṃ pālayan vane ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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