वाल्मीकि रामायण 5.39.16
अप्यर्कमपि पर्जन्यमपि वैवस्वतं यमम् ।सहि सोढुं रणे शक्तस्तव हेतोर्विशेषतः॥
apyarkamapi parjanyamapi vaivasvataṃ yamam |sahi soḍhuṃ raṇe śaktastava hetorviśeṣataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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