वाल्मीकि रामायण 5.40.7
एष चूडामणिर्दिव्यो मया सुपरिरक्षितः ।एतं दृष्ट्वा प्रहृष्यामि व्यसने त्वामिवानघ॥
eṣa cūḍāmaṇirdivyo mayā suparirakṣitaḥ |etaṃ dṛṣṭvā prahṛṣyāmi vyasane tvāmivānagha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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