वाल्मीकि रामायण 5.40.8
एष निर्यातितः श्रीमान् मया ते वारिसम्भवः ।अतः परं न शक्ष्यामि जीवितुं शोकलालसा॥
eṣa niryātitaḥ śrīmān mayā te vārisambhavaḥ |ataḥ paraṃ na śakṣyāmi jīvituṃ śokalālasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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