वाल्मीकि रामायण 5.46.31
ततस्तांस्त्रीन् हतान् ज्ञात्वा वानरेण तरस्विना ।अभिपेदे महावेगः प्रसह्य प्रघसो हरिम्॥
tatastāṃstrīn hatān jñātvā vānareṇa tarasvinā |abhipede mahāvegaḥ prasahya praghaso harim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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