वाल्मीकि रामायण 5.46.7
सनागयक्षगन्धर्वा देवासुरमहर्षयः ।युष्माभिः सहितैः सर्वैर्मया सह विनिर्जिताः॥
sanāgayakṣagandharvā devāsuramaharṣayaḥ |yuṣmābhiḥ sahitaiḥ sarvairmayā saha vinirjitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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