वाल्मीकि रामायण 5.49.8
बाहुभिर्बद्धकेयूरैश्चन्दनोत्तमरूषितैः ।भ्राजमानाङ्गदैः पीनैः पञ्चशीर्षौरिवोरगैः॥
bāhubhirbaddhakeyūraiścandanottamarūṣitaiḥ |bhrājamānāṅgadaiḥ pīnaiḥ pañcaśīrṣaurivoragaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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