वाल्मीकि रामायण 5.55.2
सन्दीप्यमानां विध्वस्तां त्रस्तरक्षोगणां पुरीम् ।अवेक्ष्य हनुमान् लङ्कां चिन्तयामास वानरः॥
sandīpyamānāṃ vidhvastāṃ trastarakṣogaṇāṃ purīm |avekṣya hanumān laṅkāṃ cintayāmāsa vānaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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